पारिजात वृक्ष के फायदे | हरसिंगार के औषधीय गुण – Parijat Tree Benefits in Hindi

पारिजात वृक्ष को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है आज हम इसी पेड़ के बारे में बात करने वाले हैं। आज के आर्टिकल में पारिजात पेड़ के फायदे, इसके महत्व और पारिजात पेड़ कहाँ पाया जाता है आदि के बारे में बात करेंगे। इसके साथ ही पारिजात या हरसिंगार के औषधीय गुणों के बारे में भी आपको बताने वाले हैं। हमें उम्मीद है की यह जानकारी आपके लिए दिलचस्प और उपयोगी साबित होगी कृपया इस लेख को अंत तक पढ़ें।

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पारिजात क्या है ?

इसके फायदे के बारे में जानने से पहले पारिजात के बारे में जानना जरूरी है तो हम आपको बता दें की पारिजात एक प्रकार का औषधीय व धार्मिक पेड़ या झाड़ी है। जिसका उपयोग भगवान हरि (श्रीकृष्ण) के श्रृंगार व पूजन के लिए किया जाता है इसलिए इसे ‘हरसिंगार’ भी कहा जाता है। इसके अलावा कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

इस पेड़ को हरसिंगार, रात की रानी, शिउली, शेफाली आदि नामों से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसके फूल को Night Jasmine बोलते हैं। पारिजात अथवा हरसिंगार का जिक्र कई प्राचीन ग्रंथों में देखने को मिलता है। इसके फूल बेहद सुगंधित, छोटी पंखुड़ियों वाले सफेद रंग के होते हैं। इस फूल के बीच का भाग चमकीला नारंगी रंग का होता है।

पारिजात का वानस्पतिक नाम निक्टैन्थिस आर्बोर-ट्रिस्टिस (Nyctanthes arbor-tritis) है जो कि ओलिएसी (Oleaceae) कुल का माना जाता है। इस पेड़ की लंबाई 10 मीटर (33 फीट) तक हो सकती है। पारिजात/हरसिंगार का पुष्प पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है।

पारिजात वृक्ष के फायदे – Parijat Tree Benefits in Hindi

संभवतः आपने भी पारिजात का पौधा और फूल जरूर देखा या इस्तेमाल किया होगा पर शायद ही आपको इसके फायदे व गुणों के बारे में जानकारी हो। तो चलिए आज पारिजात पेड़ के गुणों व फायदों के बारे में बात करते हैं इसके एक या दो नहीं बल्कि अनेकों फायदे हैं।

आइये पारिजात/हरसिंगार के पौधे व फूल के गुणों और फायदों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं:

गले संबंधी रोग में फायदेमंद

गलशुण्डी (गले के अंदर लटकने वाला कंठ) से संबंधित बीमारी में पारिजात/हरसिंगार के पौधे की जड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इस जड़ को चबाने से गलशुण्डी से संबंधित विकार जल्द ठीक हो जाते हैं। खांसी के लिए इसकी छाल का उपयोग चूर्ण के रूप में किया जाता है यह आयुर्वेदिक दवा के रूप में काम करता है। इस चूर्ण को खाने पर आपको खांसी में काफी राहत मिलेगी।

पेट के कीड़ों को खत्म करने में असरदार

ज्यादातर लोगों के पेट में कीड़े की समस्या होती है खासकर छोटे बच्चों में यह समस्या ज्यादातर पाई जाती है। इसके इलाज के लिए पारिजात के पेड़ से ताजे पत्ते का रस निकाल लें और चीनी के साथ इसका सेवन करें इससे आपके पेट और आंतों में रहने वाले गंदे व हानिकारक कीड़े एकदम से खत्म होने लगेंगे।

शुगर/ डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद

जिन लोगों को शुगर/डायबिटीज की बीमारी है वह पारिजात के पत्ते का सेवन करके अपने बढ़ते शुगर को control कर सकते हैं। 15 से 30 मिली पारिजात के ताजे पत्ते तोड़कर उसका काढ़ा बना लें और उसका सेवन करें। यह उपाय करने से शुगर की समस्या कम हो जाती है।

घाव भरने में उपयोगी

आपकी त्वचा पर किसी प्रकार का घाव है तो आप पारिजात के बीज को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को उस घाव पर लगा लें। यह विशेषकर सिर की त्वचा पर होने वाले फोड़े-फुंसी या अन्य तरह के घाव पर असरदार है। इससे घाव जल्दी भर जाएंगे।

बार-बार पेशाब आने पर इसका उपयोग है बेहतर

कई लोगों में बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है उन्हें आधी रात को कई बार पेशाब आता है जिसके कारण वे परेशान हो जाते हैं। तो इस समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए पारिजात पौधा एक कारगर उपाय है उनके इलाज में यह विकल्प मदद करेगा। पारिजात के पेड़ के तने के पत्ते, जड़ व फूल का काढ़ा बना ले बनाकर 10 से 30 मिली मात्रा में इसका सेवन करें।

तंत्रिका-तंत्र विकार में फायदेमंद

पारिजात पौधा तंत्रिका-तंत्र विकार में अच्छी औषधि के रूप में काम करता है। पारिजात व निर्गुंडी के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर इसका काढ़ा बना लें अब इस काढ़े का 15 से 30 मिली मात्रा में सेवन करें। इससे आपके तंत्रिका-तंत्र से संबंधित सभी दर्द में जल्द आराम मिलेगा।

बुखार उतारने के लिए उपयोगी

अगर आपका बुखार नहीं उतर रहा तो आपको पारिजात के पेड़ के पत्ते का काढ़ा बनाकर 10 से 30 मिली में अदरक का थोड़ा सा चूर्ण व मधु मिलाकर इस गाढ़ा का सेवन करना चाहिए इससे आपका गंभीर बुखार भी उतरना शुरू हो जाएगा।

नाक व कान से खून बहने रक्त स्राव में फायदेमंद

कुछ लोगों में नाक, कान आदि से बार-बार खून आने की समस्या रहती है इसके इलाज में पारिजात का पेड़ काफी मदद करता है। यदि किसी में रक्तस्राव की समस्या है तो उन्हें पारिजात के जड़ को मुंह में रखकर चबाना चाहिए ऐसा करने से उनके नाक, कान आदि से खून बहने की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।

गठिया में लाभकारी

पारिजात की जड़ का काढ़ा बनाकर इस्तेमाल करने पर गठिया की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। इस काढ़ा का 10-30 मिली की मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके पत्ते को पीसकर इसका लेप बनाकर जोड़ों के दर्द में इस्तेमाल किया जा सकता है इससे आपको दर्द में काफी आराम मिलेगा।

त्वचा रोग में असरदार

दाद, खाज, खुजली तथा कुष्ठ रोग आदि जैसे विकारों में यह पौधा बेहद कारगर साबित होता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आप पारिजात के पत्ते को पीसकर उसका काढ़ा या पेस्ट के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं इससे आपको काफी फर्क नज़र आएगा।

गंजापन की समस्या से छुटकारा दिलाने में असरदार

बाल झड़ने की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है वर्तमान में यह आम समस्या बन चुकी है। बहुत सारी महिलाएं और पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या का निदान करने के लिए उन्हें पारिजात बीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बीज का पेस्ट बनाकर अपने सिर पर लगाकर इस समस्या से उन्हें निजात मिल सकता है।

बवासीर से राहत दिलाने में असरदार

इसके बीज का उपयोग बवासीर जैसी गंभीर समस्या में राहत प्रदान करता है इसके बीज को पीसकर बवासीर में बाह्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है इससे बवासीर के दर्द में काफी आराम मिलता है।

महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए इसका उपयोग

पारिजात महिलाओं के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक औषधि के रूप में जाना जाता है। यह महिला स्वास्थ्य के टॉनिक के रूप में काम करता है महिलाओं के दर्द व तनाव जैसी समस्याओं को दूर करता है।

पारिजात पौधे के उपयोगी भाग

  • पारिजात पौधे के पत्ते
  • पारिजात पौधे की जड़
  • पारिजात पौधे के तने की छाल
  • पारिजात पौधे के फूल व पारिजात पौधे की बीज।

पारिजात वृक्ष का हर एक भाग औषधीय गुणों से भरपूर होता है जिनका अलग-अलग तरीके से विभिन्न प्रकार के रोगों को ठीक करने में उपयोग किया जा सकता है।

पारिजात का पेड़ कहां पाया जाता है?

पारिजात का वृक्ष भारत के ज्यादातर उपहिमालयी क्षेत्रों में 300 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है इसके अलावा यह पौधा असम, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान व बंगाल आदि राज्यों में पाया जाता है। पारिजात को पूरे भारत भर में लोग अपने घरों में लगाते हैं। इसके पौधे को ज्यादातर इसके सुन्दर फूलों के लिए लोग अपने घरों में लगाते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार कहा जाता है की हरसिंगार का वृक्ष जिसके भी घर होता है उसके घर के सभी तरह के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं।

भारत में पारिजात पेड़ का महत्व

भारत में इस फूल का धार्मिक और औषधीय महत्व है। इसके सुन्दर फूलों का उपयोग भगवान श्री कृष्ण की पूजा में की जाती है। इस पौधे के बारे में लोगों की धारणा है कि पारिजात पौधे को देवराज इंद्र ने स्वर्ग में लगाया था। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मथुरा राम मंदिर के परागण में यह पारिजात पौधे लगाए गए हैं। इसके फूल आंखों की समस्या में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं और भूख बढ़ाने तथा अन्य पाचन संबंधी विकारों को समाप्त करने में इसका उपयोग किया जाता है।

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पारिजात / हरसिंगार के फायदे – FAQ

हरसिंगार का पेड़ कहां मिलता है?

पारिजात या हरसिंगार का पेड़ भारत के ज्यादातर उपहिमालयी क्षेत्रों में 300 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है इसके अलावा यह पौधा असम, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान व बंगाल आदि राज्यों में पाया जाता है।

हरसिंगार के अन्य नाम क्या है?

हरसिंगार को पारिजात, रात की रानी, शिउली, शेफाली आदि के नाम से भी जाना जाता है।

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