अधोमुखश्वानासन के लाभ, कैसे करें? | Downward Facing Dog Pose in Hindi

अधोमुखश्वानासन (Adho Mukh Svanasana) एक सरल और प्रभावी आसन है जो की हमारे पैर, हाथ और कंधे के लिए बहुत ही लाभकारी है। यह एक महत्वपूर्ण आसन है जो की सूर्य नमस्कार के आसनों में से एक है। आज हम आपको अधोमुख श्वानासन के लाभ और अधोमुख श्वानासन करने का तरीका बताने वाले हैं।

अधोमुख श्वानासन तीन शब्दों (अधोमुख, श्वान और आसन) से मिलकर बना है, जहाँ ‘अधोमुख’ का अर्थ है निचे की ओर मुंह करना जबकि ‘श्वान’ का अर्थ होता है कुत्ता, और आसन का अर्थ है बैठना। इस आसन को कुत्ते से प्रभावित होकर बनाया गया है। जब कुत्ते को अपना आलस और थकान मिटाना होता है तब वह इसी अवस्था में अपने शरीर की स्ट्रेचिंग करता है। इस आसन को अंग्रेजी में डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज़ (Downward Facing Dog Pose) कहा जाता है।

Adho Mukh Svanasana in Hindi

अधोमुखश्वानासन के लाभ

हर आसन के अपने कई फायदे होते हैं ठीक उसी तरह अधो मुख श्वनासन से भी हमारे शरीर को कई लाभ मिलते हैं।इससे शरीर के कई अंग जैसे हाथ, पैर, कन्धा, छाती आदि मजबूत होते हैं। अगर आपको नींद नही आ रही या सिर दर्द रहता है या किसी प्रकार की मानसिक तनाव है तो इस आसन के अभ्यास के आपको फायदा मिल सकता है। इन सबके अलावा यह और भी कई बीमारियों में भी लाभकारी है। आइये अब अधोमुखश्वानासन के फायदे के बारे में और अधिक जानते हैं:

१. हाथ-पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है

इस आसन को करने से हाथ और पैर की अच्छी स्ट्रेचिंग होती है, पूरे शरीर का भार इन दोनों अंगों पर आता है। इस आसन को करने से इन दोनों अंगों पर प्रभाव पड़ता है और इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

2. मानसिक तनाव को दूर करता है

यह आसन दिमाग को शांत करता है और तनाव, डिप्रेशन और मानसिक अवसाद को दूर करता है। इससे सिर दर्द और अनिद्रा भी दूर होती है। अधोमुख श्वनासन मानसिक बेचैनी और थकान को कम करने में लाभकारी है।

3. पाचन तंत्र को सुधारता है

अधोमुख श्वनास का प्रभाव केवल बाहरी अंगों पर ही नही बल्कि शरीर के अंदरूनी भागों पर भी होता है। यह पेट अंदर के अंगों को लाभ पहुंचाता है और इससे पाचन सम्बन्धित समस्याएं ठीक होती हैं।

4. रक्त संचार को बढाता है

अधोमुख श्वनास (Downward Facing Dog Pose) करते समय व्यक्ति का सिर निचे की तरफ झुका होता है और कमर ऊपर की ओर इससे सिर की दिशा में रक्त संचार बढ़ता है इससे रक्त आपूर्ति में सहायता मिलती है।

5. पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है

इस आसन को करते समय केवल हाथ और पैर का ही नही बल्कि पेट का भी व्यायाम होता है। इससे पेट पर तनाव पड़ता है जिससे पेट की मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं।

6. कई बीमारियों में लाभकारी है

अधोमुखश्वानासन का लगातार अभ्यास करने से सायटिका, उच्च रक्तचाप, साइनस, अस्थमा जैसे रोगों में लाभ मिल सकता है। इसके अलावा सपाट पैर (फ्लैट पैर) की समस्या को भी यह आसन ठीक कर सकता है।

अधोमुख श्वानासन करने का तरीका

चलिए अब जानते हैं की अधोमुखश्वानासन कैसे करते हैं और इसकी विधि क्या है:

  1. सबसे पहले जमीन पर सीधा खड़े हो जाएँ।
  2. अपनी कमर झुकाएं और दोनों हाथों को निचे जमीन पर लायें।
  3. आपके घुटने सीधे होने चाहिए और हाथ कंधे से थोडा आगे रखें।
  4. कमर को जितना सम्भव हो सके ऊपर की तरफ उठायें।
  5. आपके कान आपके बांहों के अंदरूनी हिस्सों को स्पर्श करना चाहिए।
  6. हो सके तो इस अवस्था में अपनी दृष्टि नाभि की ओर करें।
  7. इस बात का ध्यान रखें की इस आसन में आपको उल्टा “V” की आकृति बनानी होती है।
  8. कुछ सेकंड्स तक इसी स्थिति में बने रहें फिर वापस सामान्य अवस्था में आ जाएँ।

अधोमुख श्वानासन करते समय सावधानियां

हर आसन को करते समय हमें कुछ न कुछ सावधानियों का ध्यान रखना पड़ता है। सावधानी नही बरतने पर कई बार हमें इसके विपरीत प्रभाव भी देखने को मिलते हैं इसलिए अधो मुख संवासना (Downward Facing Dog Pose) करते समय निचे दी गयी बातों का ध्यान अवश्य रखें:

  • इस आसन को करने से पहले थोडा वार्म अप कर लेना चाहिए।
  • इसे करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की आपका पेट खाली होना चाहिए।
  • आसन करते समय अपनी क्षमता से अधिक और अनावश्यक जोर न लगायें।
  • आपके शरीर का पूरा भार हाथ और पैर दोनों में बराबर होने चाहिए।
  • अगर आपकी कलाई में समस्या हो तो यह आसन ना करें।
  • कन्धा, पीठ, कमर और भुजाओं में चोंट लगी हो तो इस आसन को न करें।
  • कान और आँख में संक्रमण हो तो अधोमुखश्वानासन का अभ्यास न करें।
  • डायरिया होने पर भी इसे न करें।
  • जिन्हें कार्पल टनल सिंड्रोम की समस्या हो उन्हें यह आसन नही करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए यह आसन उचित नही है।

इस आसन को करते समय यदि आपको किसी प्रकार का दर्द या परेशानी हो तो तुरंत ही समान्य अवस्था में आ जाना चाहिए। इसे करते समय हाथ और पैर पर तनाव पड़ता है इसलिए शुरुआत में कम समय के लिए करें फिर अभ्यास हो जाने पर 30 से 90 सेकंड तक आप इसे कर सकते हैं। ध्यान रहे की बहुत अधिक समय तक इस आसन में न रहें और शरीर के किसी भाग पर बहुत अधिक जोर न लगाएं। उम्मीद है की अधोमुखश्वानासन के लाभ और अधोमुख श्वानासन करने का तरीका आपने अच्छी तरह समझ लिया है।

नोट- ऊपर दी गई जानकारी कोई चिकित्सीय सलाह नहीं है। यह जानकारी केवल शिक्षा के उद्देश्य से दी जा रही है।

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