वायु प्रदूषण पर निबंध 200, 300, 500 शब्दों में [सरल भाषा में] | Essay on Air Pollution in Hindi

विद्यार्थियों से अक्सर वायु प्रदूषण के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं या उनसे वायु प्रदूषण पर निबंध, essay on air pollution in Hindi लिखने को कहा जाता है इसलिए आज हम वायु प्रदूषण के बारे में निबंध लेकर आए हैं। वायु प्रदूषण पर निबंध 200, 300, 500 शब्दों में लिखे गये हैं जिसे

जैसा कि आप जानते हैं वायु हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है, हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरुरत होती है। यदि वायु दूषित हो जाए तो हमें सांस लेने समस्या होगी इसके अलावा प्रकृति को भी नुकसान होगा इसलिए वायु को शुद्ध रखना बहुत ही जरुरी है। तो चलिए इस निबंध के माध्यम से वायु प्रदूषण के बारे में, वायु प्रदूषण के प्रकार, इसके कारक और वायु प्रदूषण रोकने के उपाय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

वायु प्रदूषण पर निबंध

वायु प्रदूषण पर निबंध (200 शब्दों में)

हमारी पृथ्वी पर बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण अनेक जानलेवा घातक रोगों जैसे कैंसर, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट अटैक व गुर्दे संबंधी बीमारियां व मृत्यु का प्रमुख कारण बन रहा है। पर्यावरण में हानिकारक गैसों का बढ़ना अम्लीय वर्षा व ओजोन परत के क्षरण की वजह बन रहा है विशेष रूप से औद्योगीकरण के कारण वायु प्रदूषण पूरे विश्व में सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा। लोग हर दिन सड़कों पर गंदे कचरे का ढेर फैलाते हैं जो वातावरण को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभाता है इससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ जाता है।

वायु प्रदूषण के प्रकार

वायु प्रदूषण के निम्न प्रकार हैं-

रासायनिक प्रदूषण – आज के समय में उद्योगों की स्थापना के दौरान कई प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इन उद्योगों में काम के दौरान उत्पन्न रासायनिक गैस व धुआं वायुमंडल में फैलते हैं जो वायुमंडल को विषैला बनाते हैं और वायु को दूषित करते हैं इन्हें रासायनिक प्रदूषण कहा जाता है।

गैसीय प्रदूषण – कई क्रियाओं द्वारा गैसों का निर्माण होता है इन गैसों में कई तरह के प्राकृतिक तत्वों की उपस्थिति होती है। ऑक्साइड व नाइट्रोजन के जलने पर जो धुआं उत्पन्न होता है उसे गैसीय प्रदूषण के रूप में जाना जाता है।

धुआं प्रदूषण – हमारे वायुमंडल में धुआं व कोहरा जिनका निर्माण हवा में पाई जाने वाली जल की छोटी-छोटी बूंदों व जलवाष्प के कणों से होता है। इस धुन्ध के कारण वायुमंडल में सांस से संबंधित समस्याएं पैदा होती है जो घुटन पैदा करती हैं लोगों को देखने में दिक्कत होती है धुएं से उत्पन्न प्रदूषण को धुआं प्रदूषण कहते हैं।

विविक्त प्रदूषण – हवा में अनेक तरह के प्रदूषण ठोस रूप में पाए जाते हैं जैसे धूल, मिट्टी, राख आदि यह पृथ्वी की सतह पर फैल कर प्रदूषण फैलाते हैं। इस प्रकार के प्रदूषण को विविक्त प्रदूषण के रूप में जाना जाता है जो वायु प्रदूषण का रूप है।

वायु प्रदूषण निबन्ध (300 शब्दों में) – Essay on Air Pollution in Hindi

प्रस्तावना

बहुत से औद्योगिक प्रक्रियाएं वायु प्रदूषण फैलाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वायुमंडलीय हवा में बाह्य तत्वों का मिश्रण होता है। उद्योगों व मोटर वाहनों से उत्पन्न होने वाली विषैली व नुकसान दायक गैसें मनुष्यों, पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक है। ज्यादातर वायु प्रदूषण मानव गतिविधियों के कारण होता है जैसे कोयला, तेल व जीवाश्म ईंधन जलाना हानिकारक गैसें छोड़ना आदि। वाहनों का बढ़ता उपयोग 69% तक वायु प्रदूषण में वृद्धि का कारण है।

वायु प्रदूषण क्या है ?

हवा में उपस्थित हानिकारक पदार्थ व कण जो प्रदूषण फैलाते हैं या प्रदूषण का कारण बनते हैं उन्हें वायु प्रदूषण कहा जाता है। प्रदूषकों को प्राथमिक और द्वितीयक के रूप में विभक्त किया गया है। प्राथमिक प्रदूषक सीधे एक प्रक्रिया से उत्सर्जित होते हैं जबकि द्वितीय प्रदूषक सीधे उत्सर्जित नहीं होते हैं। हमारे वातावरण के वायु में 78% नाइट्रोजन 21% ऑक्सीजन और अन्य 1% में मेथेन, ऑर्गन आदि जैसे गैसें मुख्य रूप से शामिल हैं।

वायु प्रदूषण फैलने के कारण

वातावरण में वायु प्रदूषण फैलने के निम्नलिखित कारण हैं जैसे:

  • जनसंख्या में वृद्धि, 
  • वनों की कटाई,
  • वातावरण में उड़ती धूल व मिट्टी,
  • ज्वालामुखी से उत्पन्न जहरीली गैस व लावा,
  • आंधी व तूफान, 
  • प्राकृतिक रूप से जंगलों में लगने वाली आग, 
  • कारखानों व उद्योगों से निकलती दूषित गैस, 
  • पराली का जलाना, 
  • परमाणु परीक्षण द्वारा निकलने वाले जहरीले तत्व, 
  • गंदगी से उड़ने वाली बदबू और धूम्रपान आदि।

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

वायु प्रदूषण से सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा, खांसी, घबराहट, हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। वायु प्रदूषण के सबसे आम स्रोतों में ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, निलंबित कण आदि शामिल होते हैं। खराब वायु गुणवत्ता हमारे ह्रदय प्रणाली व श्वास प्रणाली पर मुख्य रूप से असर डालते हैं। विकासशील देशों में वायु प्रदूषण की खराब स्थिति के कारण 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। WHO(World Health Organization), विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिवर्ष दुनिया भर में लगभग 70 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है यह संख्या 88 लाख तक भी हो सकती है।

वायु प्रदूषण पर निबन्ध (500 शब्दों में)

आज हम आपके लिए वायु प्रदूषण पर लेख लेकर आए हैं उसके पहले जान लेते हैं कि प्रदूषण क्या है व इसके कितने प्रकार हैं।

प्रदूषण क्या है व इसके प्रकार

हमारे वातावरण में हानिकारक, जीव नाशक, विषैले पदार्थों की उपस्थिति को प्रदूषण कहा जाता है। प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं- 

  1. जल प्रदूषण
  2. वायु प्रदूषण 
  3. मृदा प्रदूषण 
  4. ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण के प्रभाव

वायु प्रदूषण लगातार बढ़ती जा रहा जिसके कारण कई दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। यह दुष्प्रभाव धरती पर मानव जीवन यापन के लिए एक बेहद गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। वायु प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव निम्न प्रकार के हैं;

  • ऑक्सीजन की कमी – पृथ्वी पर बढ़ते वायु प्रदूषण के वजह से ऑक्सीजन गैस की मात्रा में कमी होती जा रही है पहले पृथ्वी के वातावरण में 24% ऑक्सीजन गैस की मात्रा की उपस्थिति थी लेकिन धीरे-धीरे इसकी मात्रा में कमी हो रही। एक रिपोर्ट अनुसार वर्तमान में हमारे पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा घट कर 22% मात्र रह गई है।
  • तापमान का बढ़ना – जैसे-जैसे वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही वैसे-वैसे ही धरती का तापमान भी बढ़ता जा रहा। किए गए एक रिसर्च की रिपोर्ट अनुसार, यदि इसी रफ्तार में वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती रही तो पृथ्वी का तापमान बढ़ता ही जाएगा और लोग गर्मी व पानी की कमी से बेहाल होने लगेंगे। अगर पृथ्वी का तापमान 2 से 3% भी बढ़ता है तो पृथ्वी के हिम ग्लेशियर पिघलने शुरू हो जाएंगे और भयानक बाढ़ का प्रलय आ जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो पृथ्वी का अंत होना निश्चित है।
  • वातावरण का प्रभावित होना – हवा में प्रदूषण की उपस्थिति के कारण हमारे पृथ्वी का वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है जिस वजह से पृथ्वी का संतुलन बिगड़ता जा रहा। पृथ्वी पर आने वाली सभी आपदाओं का कारण प्रदूषण है हमें अपने वातावरण को बचाए व सुरक्षित रखने के लिए प्रदूषण पर रोकथाम करना बेहद आवश्यक है।
  • बीमारियों में बढोत्तरी – लोगों की लापरवाही के कारण अस्वच्छता फैलती ही जा रही है जिसके कारण अनगिनत कीट व मच्छर पनप रहे हैं जो हमारे स्वास्थ्य का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। इन कीटों व मच्छरों के काटने से लोगों को गंभीर बीमारी हो जाती है और ना जाने कितने लोग प्रतिवर्ष इन बीमारियों से लड़ते-लड़ते मौत के मुंह में चले जाते हैं। गंदगी से उत्पन्न बीमारियां हमारे स्वास्थ्य के लिए जानलेवा है इसलिए हमें अपने आसपास की स्वच्छता पर ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

वायु प्रदूषण रोकने के उपाय

वायु प्रदूषण रोकथाम करने के उपाय हैं:

  • वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए पेड़ पौधों का होना बहुत आवश्यक है इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने चाहिए क्योंकि पौधे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं जिससे हवा प्रदूषण में कमी होती है।
  • जनसंख्या ज्यादा होने से ज्यादा उद्योगों की भी आवश्यकता पड़ रही इस प्रकार यदि जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण किया जाए तो वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण हो सकता है।
  • वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए उन कारखानों व उद्योगों पर रोक लगानी होगी जो अधिक मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।
  • प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सभी देशों की सरकारों को नए नियम और कानून बनाने व लागू करने की आवश्यकता है जिससे कि मानव द्वारा उत्पन्न वायु प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके।
  • अगर वायु प्रदूषण रोकना है तो यह आवश्यक है कि हम सभी को इसके बारे में व उपाय के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने चाहिए और लोगों को इसके रोकथाम के लिए सचेत करना चाहिए।
  • वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए परमाणु ऊर्जा और कोयले के उपयोग पर रोकथाम या कमी करनी होगी और सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना होगा।
  • वायु प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए हमें निजी के बजाय सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करना चाहिए।

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